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घर के भीतर ठहर जाना

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Lyrics

[Verse 1]

धीरे से नाव किनारे लगी

फूलों की खुशबू पानी में घुली

तेरी आँखों में ठहरी दुआ

मेरे हाथों में आख़िरी तुलसी


[Pre-Chorus]

जाने की बात न करना अभी

दिल ने तुझे पूरा देखा नहीं


[Chorus]

गणपति, आज नदी तक आए

मन ने तेरे पाँव सजाए

पर लौटते हुए इतना सुन जाना

घर के भीतर ही ठहर जाना


[Verse 2]

मिट्टी की देह जल में गई

पर गर्मी तेरी चौखट पर रही

रसोई में दीपक धीमा है

तेरी हँसी अभी दीवारों पर रही


[Bridge]

विसर्जन केवल जल का है

साथ तेरा तो साँसों का है

कल जब सुबह दरवाज़ा खुले

पहले आँगन में तू ही मिले


[Chorus]

गणपति, आज नदी तक आए

मन ने तेरे पाँव सजाए

पर लौटते हुए इतना सुन जाना

घर के भीतर ही ठहर जाना


[Outro]

मत जाना दूर, मेरे अपने

रहना इन छोटे कमरों में

मोदक की मीठी ख़ुशबू बनकर

रहना माँ की प्रार्थनाओं में


घर के भीतर ही ठहर जाना

घर के भीतर ही ठहर जाना

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Last Updated

Sep 25, 2026