Lyrics
(Mukhda)
हे जगत के नाथ, मेरे प्यारे जगन्नाथ…
तू जो संग हो, तो मेरा बनता हर काम…
तुझसे ही सुबह मेरी, तुझसे मेरी शाम…
हे जगत के नाथ… मेरे प्यारे जगन्नाथ…
हे जगत के नाथ… मेरे प्यारे जगन्नाथ…
जगन्नाथ… जगन्नाथ…
[अंतरा 1]
जब भी मैं भटका राहों में, तूने ही राह दिखाई…
तूने थामी बाहें मेरी, जब दुनिया ने ठुकराई…
अंधियारों के पहरों में, तू ज्योति बनके समाया…
तेरी करुणा ने मुझको फिर से जीना सिखाया…
तू ही मेरा सहारा है, तू ही मेरा धाम…
दिल की धड़कनों में है बसता तेरा नाम…
तू जो संग हो… तो मेरा बनता हर काम…
हे जगत के नाथ, मेरे प्यारे जगन्नाथ…
जगन्नाथ… जगन्नाथ…
[2]
तेरे दर की धूल में भी, है अमृत का वास…
तू ही है भरोसा मेरा, तू ही मेरी आस…
बिखरा हुआ था मैं, तुमने ही सजाया…
मेरे हर टूटे हिस्से को, तुमने सँवारा…
डगमगाती नैया को, तूने संभाला…
भटके हुए राही का तू है किनारा…
तू जो संग हो… तो मेरा बनता हर काम…
हे जगत के नाथ, मेरे प्यारे जगन्नाथ…
जगन्नाथ… जगन्नाथ…
[3]
खाली थी झोली मेरी, तूने उसे भरा…
तेरी कृपा से ही प्रभु, जीवन में रस भरा…
बिन मांगे मिलता मुझको, तेरा ही वरदान…
तेरे दिए हुए अन्न से, मिलता है सम्मान…
तू ही सबका पालनहार, तू ही दीनों का राम…
रखवाली करता है तू, सबकी सुबह शाम…
तू जो संग हो… तो मेरा बनता हर काम…
हे जगत के नाथ, मेरे प्यारे जगन्नाथ…
जगन्नाथ… जगन्नाथ…
तू ही शून्य…
तू ही अनंत…
तू ही आदि…
तू ही है अंत…
मेरे रोम-रोम में बसता है तेरा पावन नाम…
जगन्नाथ… जगन्नाथ… जगन्नाथ…
हे जगत के नाथ, मेरे प्यारे जगन्नाथ…
तू जो संग हो, तो मेरा बनता हर काम…
तुझसे ही सुबह मेरी, तुझसे ही मेरी शाम…
हे जगत के नाथ… मेरे प्यारे जगन्नाथ…
मेरे प्यारे जगन्नाथ…
जगन्नाथ… जगन्नाथ
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Last Updated
Apr 21, 2026