Lyrics
न जाने क्यूँ…
जब भी खुद को ढूँढने निकलती हूँ…
तेरा ही नाम साथ चलता है…
ना तुझे पुकारती हूँ…
ना तेरा ध्यान करती हूँ…
फिर भी हर पल… तू पास लगता है…
एक अजीब सी शांति है तुझमें…
जो दिल को थाम लेती है…
मैं तो बस बहती जा रही थी…
पर तू ही… मुझे अपना बनाता जा रहा है…
Starting (मुखड़ा)
मेरे राम… मेरे राम… मेरे राम…
रग-रग में बह रहा है, तेरा नाम
मेरे रोम-रोम में बस गया… तेरा धाम
मेरे राम… मेरे राम…मेरे राम..
वो बहा ले जा रहा है, मैं बहती जा रही हूँ,
मेरा राम… मेरा काम… बनाए जा रहा है…
मुझे भक्ति के रंग में… भिगोये जा रहा है,
मुझे अपना… हाँ अपना… बनाए जा रहा है…
रग-रग में बह रहा है… तेरा नाम मेरे राम…
Stranga 1
मैंने माँगा नहीं कुछ भी, फिर भी झोली भर गई,
तेरी एक नज़र क्या पड़ी, मेरी दुनिया सँवर गई।
कोई समझे न समझे, पर मेरा राम समझता है,
मेरे आँसुओं की भाषा… वो चुपके से पढ़ता है…
मेरी नस-नस में समाया… तेरा प्यार मेरे राम…
रग-रग में बह रहा है… तेरा नाम मेरे राम…
मेरे राम… मेरे राम…मेरे राम..
Verse 2
जहाँ दुनिया छोड़ देती है, वहाँ तू हाथ थामता,
तेरे दर पे जो आ गया, वो किसी और को नहीं जानता।
मेरी नैया का खेवनहार… मेरा रघुवर ही तो है,
मेरी हार में भी छिपी… मेरी जीत ही तो है…
वो बहा ले जा रहा है, मैं बहती जा रही हूँ,
मेरा राम… मेरा काम… बनाए जा रहा है…
मेरे राम… मेरे राम… मेरे राम…
रग-रग में बह रहा है… तेरा नाम मेरे राम…
मेरे राम… मेरे राम… मेरे राम
मेरे राम.. मेरे राम.. मेरा राम...
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Last Updated
Mar 31, 2026