Lyrics
[Intro]
रघुनन्दन राघव राम हरे…
सीताराम हरे… सीताराम हरे…
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Verse ]
हे अवतारी, जगहितकारी,
दुष्ट विनाशक, भवभय हारी।
दोष दलन की शक्ति हमें दो,
अपनी निर्मल भक्ति हमें दो॥
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Verse 2]
वह भक्ति जो सबसे प्रेम करे,
हर प्राणी में प्रभु को धरे।
नफरत की हर दीवार मिटे,
प्रेम सुधा हर मन में भरे॥
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Verse 3]
तुमने पिछड़ों को अपनाया,
प्रेम दिया सम्मान दिलाया।
हमको भी ये कला सिखा दो,
भेदभाव का भूत भगा दो॥
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Verse 4]
मायावी बढ़ रही असुरता,
विकल हो रही आज मनुजता।
जन-जन में देवत्व जगा दो,
जीवन में सहयोग बढ़ा दो॥
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Bridge ]
मानव की बढ़ गई शक्तियाँ,
दानव सी क्यों हुई वृत्तियाँ।
प्रभु! सबके मन स्वच्छ बना दो,
सबमें शुभ सद्भाव जगा दो॥
[Final Chorus]
रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥
(रघुनन्दन राघव राम हरे,
सीताराम हरे सीताराम हरे॥)
[Ending]
हरे राम… हरे राम…
हरे राम… हरे राम…
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Last Updated
May 17, 2026